About Foundation

संत ईश्‍वर फाउंडेशन के बारे में

समाजिक दायित्व से प्रेरित होकर सेवा सम्बन्धी अपने कार्यों को संस्थागत स्वरुप देने और सेवा-संस्कृति के प्रचार- प्रसार करते हुए संत ईश्वर सम्मान की स्थापना की । यह सेवा न्यास संस्थागत नियम- कायदों के अनुसार पूजनीय श्री खैराती लाल खन्ना जी की प्रेरणा से बनाया गया।सेवा न्यास का स्पष्ट स्वघोषित संकल्प है कि संत ईश्वर फाउंडेशन सामाजिक एकता, सामाजिक how to start an introduction in a research paper समरसता, शिक्षा, महिला एंव बाल कल्याण, के साथ ही गांवों और वनों में निवास करने वाले अशिक्षित साधनहीन गरीब लोगों के विकास के लिए कार्य करना। जो व्यक्ति या सेवी संस्थाएं, सेवा के इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान कर रहे हैं, उन्हें सहायता देना तथा राष्टीªय स्तर पर उनका सम्मान करना फाउंडेशन के आधारभूत क्रियाकलापों में शामिल किया गया।

संत ईश्वर फाउंडेशन ने राष्टीªयव्यापी सेवा संस्थान राष्टीªय सेवा भारती से भी सम्बद्ध रखकर सुदूर क्षेत्रों तक अपने सेवा अभियानों को पहुँचाने का प्रयास किया है। इस तरह के प्रयासों की कड़ी में प्रति वर्ष चार व्यक्तियों अथवा स्वयंसेवी संस्थाओं को संत ईश्वर विशिष्ट सेवा सम्मान एवं बारह व्यक्तियों या संस्थाओं को संत ईश्वर सेवा सम्मान प्रदान करने की योजना बनाई गयी। इससे जुड़ी खोज व शोध में अनेक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त महानुभावों का सहयोग भी प्राप्त हुआ। सम्मानित होने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं का चयन भी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश, समाज सेवक, वरिष्ठ पत्रकार एवं कलाकर्मीयों के सहयोग से होता है।

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे वनवासी लोग हैं जो जंगलों, पहाड़ों और नदियों के सीमा, पवर्तीय क्षेत्रों में रहते हैं। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा के अभाव में गरीबी, बीमारी, अशिक्षा और शोषण के साथ जीवन जीने को मजबूर हैं। ऐसी विशाल जनसंख्या को कठिन परिस्थिति से उबारने में जुटे लोगों एवं संस्थाओं को सम्मानित करना व उनके कार्यों को गति देना संस्था के लक्ष्यों में एक है।

इसी प्रकार हमारे देश का 70 प्रतिशत जनसमूह अविकसित गांवों में रहता है। वहां साधनो के अभाव, गरीबी, अशिक्षा और जातिगत छुआछुत से घिरा रहता है। इन विकट परिस्थितियों से जूझते लोगों को आर्थिक विकास एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान नहीं। सामान्य सुविधाएं भी अब तक इन लोगों तक नहीं पहुंची हैं। अतरू संस्था की भावना है कि सेवा कार्यों का इस तरह विस्तार किया जाए कि विकास का उजाला गांव- गांव, घर-घर तक फैले।

संत ईश्वर फाउंडेशन के ट्रस्टी मानते हैं कि परिवार और समाज का विकास, घरों को अपने श्रम, अपनी योग्यता, प्रतिभा से संचालित कर रही महिलाओं पर बहुत- कुछ निर्भर है। पूर्व की शताब्दियों में भारतवर्ष की महिलाओं के स्तर मे विशाल परिवर्तन का विषय रहा। देवी के रूप में प्रतिष्ठित होने से लेकर आज के वातावरण में हिंसा, शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक शोषण होने तक की स्थिति हमारी माताओं- बहनों ने सहन की है। जब तक महिलाओं के स्तर में सुधार नहीं होगा, बाल विकास की गारंटी नहीं हो सकती तथा बिना बाल विकास के भावी पीड़ियों का भविष्य कैसे उज्ज्वल होगा? यह चिंता व चिन्तन का विषय है।

संत ईश्वर फाउंडेशनश समाज के इस आधारभूत पक्ष को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
वर्ष 2016 को संत ईश्वर सम्मान का आयोजन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। समारोह में मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्षा श्रीमती सुमित्रा महाजन एवं स्वामी ज्ञानानन्द महाराज तथा अन्य कई विशिष्ट सम्मानित व्यक्ति व विश्रुत हस्तियाँ उपस्थित रही। गत वर्ष 2017 को संत ईश्वर सम्मान नई दिल्ली के संसद मार्ग पर स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर के सभागार में आयोजित इस समरोह में विविध क्षेत्रों में कार्यरत देशभर से आमंत्रित जन एवं प्रतिष्ठित समाजसेवी पधारे समारोह में विशेष रूप से पधारे केन्द्रीय एवं पेयजल स्वचछता मंत्री सुश्री उमा भारती जी, एंव परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री अश्विनी चैबे जी उपस्थित रहे।

यह सम्मान केवल समारोह आयोजित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों एवं कार्यों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उदाहरण प्रस्तुत करने वालों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। राष्ट्रीय सेवा भारती जैसा राष्ट्रव्यापी सेवा आन्दोलन भी इस विचार का समर्थन करता है। यह अपने आप में महत्वपूर्ण है। संत ईश्वर सम्मान महान और पावन कार्यों में जुटे best college paper writing service वीरों का उत्सावर्धन करता है। देश के सम्मनित विचारकों, न्यायवादियों, समाजशास्त्रियों, पत्रकारों, कलाकर्मियों और शोधार्थियों का भी व्यापक समर्थन संस्था के मिशन को प्राप्त है।

आशा है संस्थान के इस सराहनीय प्रयास से सेवा क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के अतिरिक्त उन्हें भी प्रेरणा मिलेगी जिनके भीतर ऐसा कुछ करने की इच्छा किन्हीं कारणवश दबी रह गई।