About Sant Eshwer Foundation

संत ईश्‍वर सम्मान का परिचय

संत ईश्वर सम्मान एक प्रयास है जिस के द्वारा ऐसे संगठनों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है, जो जमीनी स्तर पर समाज की नजरों से दूर निस्वार्थ भाव से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं। यह सम्मान संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्टीªय सेवा भारती के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जाता है। यह सम्मान व्यक्ति अथवा संगठनों को दिया जाता है। जिन्होने जनजातीय कल्याण, ग्रामीण विकास, महिला एंव बाल कल्याण, विशेष योगदान (कला, साहित्य, पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा) जैसे क्षेत्रों में जहाँ सुविधाओं की कमी है, वहां उत्कृष्टता हासिल की है । इन पुरस्कारों के विजेताओं का चयन संत ईश्वर सम्मान समिति के द्वारा किया जाता है।

संत ईश्वर सम्मान समिति निर्णायक मंडल की में कई प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल जैसे की -ः
  • से.नि. मुख्य न्यायाधीश श्री प्रमोद कोहली- से.नि. अध्यक्ष, केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट)
  • पदम्श्री जवाहर लाल कौल- प्रसिद्ध पत्रकार ; अध्यक्ष, जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र ; वरिष्ट पत्रकार
  • पदम्श्री राम बहादुर राय -अध्यक्ष , इंदिरा गाँधी कला केंद्र ;  वरिष्ट पत्रकार
  • श्री सिद्धिनाथ सिंह- अध्यक्ष, राष्ट्रीय सेवा भारती
  • श्री गुनवंत कोठारी-, अखिल भारतीय कार्यकरिणी सदस्य रा.स्व.स्व
  • श्री कपिल खन्ना-ट्रस्टी, संत ईश्वर फाउंडेशन; अध्यक्ष , संत ईश्वर सम्मान समिति
संत ईश्वर सम्मान व्यक्ति, स्वैच्छिक संगठन, लोगों के समूह को दिया जाता है, जो निम्नलिखित क्षेत्रों में देश के विकास के साथ काम कर रहे हैं-ः

जनजातीय क्षेत्र:भारत में  645 से अधिक विभिन्न तरह के जनजाति क्षेत्र के लोग रहते हैं जिनकी संख्या 8.6 प्रतिशत है। ये गरीबी, ऋणात्मकता, निरक्षरता बंधन, शोषण, बीमारी, बेरोजगारी आर्थिक और तकनीकी पिछड़ापन जैसी अनेकों समस्याओं का सामना करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों में लगभग 70 प्रतिशत आबादी रहती है जो कि आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर रहती है। ग्रामीण इलाकों और खेती एवं उसकी सहायक गतिविधियों का विकास अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

महिला और बाल विकास: पिछली शताब्दियों में भारत की महिलाओं का स्तर कई परिवर्तनों का हिस्सा रहा है। पहले देवी के रूप में प्रतिष्ठित होने से लेकर आज के वातावरण में हिंसा, रेप, वेश्यावृत्ति, शारीरिक, मानसिक एवं समाजिक शोषण  का शिकार होने तक की स्थिति हमारी माताओं- बहनों ने सहन की है। यह भी सर्वविवादित है कि जब तक महिला एवं बाल विकास के स्तर में सुधार नहीं होता तब तक बाल विकास की गारंटी नहीं दी जा सकती।

विशेष योगदान: (भारतीय विचार, कला- साहित्य और आत्मनिर्भरता) आदि पर आधारित है। हमारा  राष्ट्र अपनी भिन्न सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्व है। जो भारतीय विचार, कला- साहित्य व आत्मनिर्भरता) आदि पर आधारित है। यह विरासत उन लोगों द्वारा निर्मित की गयी है  जो समाज की संवेदनशीलता को  विभिन्न माध्यमों के द्वारा व्यक्त करते हैं। इन  पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य इन योगदानों को  मान्यता देना है। यह सम्मान केवल समारोह आयोजित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों एवं कार्यों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उदाहरण प्रस्तुत करने वालों को मंच प्रदान करने  के उद्देश्य से किया जाता है।

संत ईश्वर सम्मान तीन श्रेणी में स्थापित किया जाता है -ः

संत ईश्वर विशेष सेवा सम्मान: यह सम्मान एक ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है, जो अपने कार्य क्षेत्र मे सफल व प्रसिद्ध है परन्तु इसको  अतिरिक्त समाज सेवा के क्षेत्र भी अपना बहुमूल्य योगदान दे रहा है। सम्मानित व्यक्ति  को शाॅल, ट्रॉफी, एवं प्रमाण पत्र के द्वारा पुरस्कृत किया जाता है।

संत ईश्वर विशिष्ट सेवा सम्मान: सम्मानित चार व्यक्तियों,  स्वैच्छिक संगठनों,अथवा लोगों के समूह के प्रत्येक विजेता को 5 लाख रुपए, शाॅल, ट्रॉफी, एवं प्रमाण पत्र के द्वारा पुरस्कृत किया  जाता है।

संत ईश्वर सेवा सम्मान: 1 राशि, शाॅल, ट्राफी, प्रमाण- पत्र व प्रतीक मुद्रा के द्वारा सम्मानित किया जाता है। 32 लाख की कुल धनराशि प्रत्येक वर्ष ऐसे अनुकरणीय व्यक्ति और संगठन एवं समूह के लोगों को पुरस्कृत की जाती है।